
*भारत में कुत्तों की नसबंदी (sterilization) / नियंत्रण* — विशेष रूप से आवारा (stray) कुत्तों के लिए — *मापदंड (guidelines / rules / policy framework)* कैसे तय किए गए हैं, और किन‑किन ज़रूरतों, जिम्मेदारियों और प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक है। ❗ यह जानकारी 2023 के नए नियमों और हाल की स्थिति पर आधारित है।
📜 वैधानिक / कानूनी आधार
– भारत में आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का काम मुख्य रूप से Animal Birth Control Rules, 2023 (ABC Rules, 2023) के तहत किया जाता है। [1]
– ये नियम Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 के अंतर्गत बनाए गए हैं। [2]
– इसके तहत, किसी भी नगर निगम, पंचायत या स्थानीय निकाय (local authority) को आवारा कुत्तों के प्रबंधन — जिसमें नसबंदी, वैक्सीनेशन, देख‑रेख, रिकॉर्ड‑कीपिंग आदि शामिल हैं — की जिम्मेदारी दी गई है। [3]
✅ नसबंदी (Sterilization) के लिए मुख्य मापदंड / ज़रूरतें
1. *Humanely sterilize & vaccinate + release back*
– नसबंदी (sterilization) के साथ-साथ हर कुत्ते को रैबीज का टीका (anti‑rabies vaccination) देना अनिवार्य है। [4]
– नसबंदी के बाद — यदि कुत्ता स्वस्थ हो — उसे उसी क्षेत्र में वापस छोड़ना चाहिए जहाँ से पकड़ा गया था। [3]
2. *Infrastructure requirements*- नगर निकायों को पर्याप्त सुविधाओं (सर्जरी थिएटर, पशु‑चिकित्सा सुविधा, केनेल / आवास, रिकवरी युनिट, वाहन, देखभाल) उपलब्ध कराने होंगे। [3]
– एडमिनिस्ट्रेटिव व्यवस्था: कस्बों / शहरों में नसबंदी केन्द्र (ABC Centers) स्थापित करना। [3]
3. *Record‑keeping और डेटा प्रबंधन*
– हर कुत्ते का रिकॉर्ड: कब पकड़ा, कब नसबंदी हुई, वैक्सीनेशन, पहचान (ear‑tag / micro‑chip / marking) आदि दर्ज करना। [5]
– क्षेत्रवार (area‑wise) ट्रैकिंग — sterilized / vaccinated / released कुत्तों का विभाजन। [5]
4. *Coverage Target (जनसंख्या नियंत्रण लक्ष्य)*
– WHO और विशेषज्ञों के अनुसार, किसी क्षेत्र में कुत्तों की नसबंदी के लिए लक्ष्य होना चाहिए कि कम‑से‑कम *70%* कुत्तों को एक प्रजनन‑चक्र (≈ 6 महीने) में sterilize और vaccinate किया जाए। [4]
– विशेष ध्यान: मादा कुत्तों (female dogs) की नसबंदी में प्राथमिकता — आमतौर पर 70:30 (female:male) से। [4]
5. देखभाल + पशु कल्याण (Animal Welfare)*
– नसबंदी के बाद कुत्तों को ठीक तरह से देखभाल (post‑operative care), संक्रमण‑रोधी दवाएं, आराम, भोजन उपलब्ध कराना अनिवार्य है। [6]
– किसी भी बीमारी, आक्रामक व्यवहार या रैबीज़ के लक्षण दिखने पर उचित चिकित्सकीय देखभाल या संगरोध की व्यवस्था। [3]
6. स्थानीय निकायों की ज़िम्मेदारी*
– नगर निगम, नगरपालिका, पंचायत आदि स्थानीय निकायों को ABC कार्यक्रम लागू करना होगा। [3] turn0search28- साथ ही, आवारा कुत्तों के लिए आवास / shelter सुविधाओं व पशु अस्पताल/पशुचिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था करना भी स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है। [3]
📌 अन्य प्रावधान और बिंदु
– निजी संस्था / NGO / पशु कल्याण संगठन (Animal Welfare Organization) जिन्हें Animal Welfare Board of India (AWBI) द्वारा मान्यता दी गई हो, वे नसबंदी अभियान चला सकती हैं। [2]
– नसबंदी और टीकाकरण कार्यक्रमों का क्षेत्र‑आधारित (area‑based) दृष्टिकोण अपनाना चाहिए — यानी, एक‑एक मोहल्ला / वार्ड / ज़िला को लगातार मॉनिटर करना चाहिए। [5]
– यदि कोई कुत्ता रैबीज़ संक्रमित या आक्रामक पाया जाए — उन्हें वापस xछोड़ने की बजाय shelter / quarantine में रखना चाहिए। [3]
🟡 2025 में नया अपडेट: चुनौतियाँ और बहस
2025 में, कुछ अदालतों/नगर निकायों द्वारा अलग निर्देशों का प्रस्ताव — जैसे कि sterilised dogs को छोड़ने की बजाय shelters में रखने की मांग, विशेष रूप से उन कुत्तों के लिए जिन्हें बार‑बार काटने की रिपोर्ट मिले हों। [7]
– लेकिन, पशु कल्याण समूहों ने तर्क दिया है कि यह कदम Animal Birth Control Rules, 2023 के उद्देश्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मेल नहीं खाता — क्योंकि relocation / cmass confinement से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता। [8]
✅ निष्कर्ष
– भारत में आवारा कुत्तों की नसबंदी और नियंत्रण के लिए एक स्पष्ट कानूनी और तकनीकी ढाँचा मौजूद है — ABC Rules, 2023.- यदि इन मापदंडों — जैसे sterilization + vaccination + record‑keeping + humane handling + area‑wise coverage + shelter facilities — का पालन ठीक से हो, तो कुत्तों की आबादी नियंत्रित की जा सकती है, और रैबीज़, डॉग‑बाइट या मानव–कुत्ता संघर्ष जैसी समस्याएँ कम हो सकती हैं।
– साथ ही, पशु कल्याण, दयाभाव और समाज‑सुरक्षा के बीच सही संतुलन बने — यही इस नीति का मूल उद्देश्य है।
Courtesy by:-
Ngo Grants Helpline