Hysteria (Neurological Disorders) Symptoms & Treatment

हिस्टीरिया (Hysteria)

*हिस्टीरिया: एक उपेक्षित लेकिन महत्वपूर्ण मानसिक रोग*

*परिचय:*  

हिस्टीरिया एक मानसिक और न्यूरोलॉजिकल विकार है, जिसमें व्यक्ति असामान्य भावनात्मक प्रतिक्रिया, डर, या शारीरिक लक्षणों के माध्यम से मानसिक तनाव को व्यक्त करता है। यह रोग ज्यादातर युवाओं और महिलाओं में देखा जाता है, लेकिन पुरुष भी इससे अछूते नहीं हैं।

हिस्टीरिया कोई झूठा रोग नहीं है, बल्कि यह शरीर और मन की गंभीर गड़बड़ी का संकेत हो सकता है, जिसे सही समय पर समझना और उपचार करना जरूरी है।

*हिस्टीरिया के प्रमुख लक्षण*

1. *अचानक रोना, चिल्लाना या हँसना*

2. *बेहोश हो जाना या शरीर अकड़ जाना*

3. *सांस लेने में कठिनाई, घबराहट*

4. *शरीर के किसी हिस्से में अस्थायी लकवा या संवेदनहीनता*

5. *बोलने में दिक्कत या आवाज बंद हो जाना*

6. *आंखों के सामने अंधेरा या चक्कर आना*

7. *अत्यधिक भावनात्मक प्रतिक्रियाएं*

8. *ध्यान भटकना, स्मृति दोष

*हिस्टीरिया के संभावित कारण*

1. *अत्यधिक मानसिक तनाव:*

परीक्षा, नौकरी, विवाह, या पारिवारिक दबाव आदि।

2. *भावनात्मक दमन:*

जब व्यक्ति अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पाता, तो वो हिस्टीरिया का रूप ले सकती हैं।

3. *अतीत के आघात:*- *ध्यान (Meditation):* मस्तिष्क को विश्राम देने का श्रेष्ठ उपाय

*आधुनिक उपचार विधियाँ*

– *साइकोथेरेपी (Counseling):* रोगी की भावनाओं को समझना और मानसिक समर्थन देना

– *कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT):* नकारात्मक सोच को सकारात्मक में बदलना

– *मनोविश्लेषण (Psychoanalysis):* बचपन के अनुभवों को पहचानकर समाधान देना

*रोगी से व्यवहार कैसे करें*

– रोगी का उपहास न उड़ाएँ, न ही उसे झूठा कहें

– प्यार और समझदारी से पेश आएं

– मानसिक सहारा देना जरूरी है

– रोगी को अकेला न छोड़ें, उसे सुरक्षा और अपनापन महसूस कराएँ

*हिस्टीरिया से बचाव के उपाय*

1. भावनाओं को दबाने की आदत से बचें

2. किसी पर भी अत्यधिक मानसिक दबाव न डालें

3. समय-समय पर मानसिक सलाह लें

4. सकारात्मक वातावरण में रहें

5. तनाव को कम करने वाले शौक अपनाएँ

6. नियमित व्यायाम, योग और ध्यान करें

*निष्कर्ष*

हिस्टीरिया एक मनोवैज्ञानिक रोग है जिसे गंभीरता से लेना चाहिए। समाज में इसे अक्सर नाटक या बहाना समझ लिया जाता है, जिससे रोगी को और अधिक मानसिक कष्ट झेलना पड़ता है। यदि हम समय रहते सही मार्गदर्शन, चिकित्सा और सहारा दें, तो यह रोग पूरी तरह से ठीक हो सकता है। आयुर्वेदिक औषधियाँ, योग, और मानसिक समर्थन मिलकर रोगी को संतुलित और स्वस्थ जीवन जीने की ओर ले जा सकते हैं।

बचपन में शोषण, डरावना अनुभव, या किसी गंभीर हादसे का असर।

4. *ध्यान पाने की प्रवृत्ति:*

कुछ लोग अनजाने में दूसरों का ध्यान पाने के लिए ऐसी प्रतिक्रिया देने लगते हैं।

5. *हार्मोनल असंतुलन:*

खासकर महिलाओं में मासिक चक्र या रजोनिवृत्ति के दौरान।

6. *वंशानुगत कारण:*

मानसिक रोगों का पारिवारिक इतिहास भी कारण हो सकता है।

*हिस्टीरिया का आयुर्वेदिक दृष्टिकोण*

आयुर्वेद के अनुसार हिस्टीरिया मनोविकार (Unmada) की एक स्थिति है, जिसमें “सत्त्व” (मानसिक शक्ति) कमजोर हो जाती है और “रज” व “तम” जैसे दोष मन पर हावी हो जाते हैं।

योग एवं प्राणायाम से उपचार*

– *भ्रामरी प्राणायाम:* मानसिक शांति के लिए सर्वोत्तम

– *अनुलोम-विलोम:* मन को संतुलित और स्थिर करने में सहायक

– *योगासन:* शवासन, वज्रासन, बालासन आदि तनाव कम करने में उपयोगी

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Dr. Rosho

Centre of Research in Neurological Disorders 

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